अखिर कोन है दुनिया के रचता , किसने लिखे वेद-पुराण?

अखिर कोन है दुनिया के रचता , किसने लिखे वेद-पुराण?

अखिर कोन है दुनिया के रचता , किसने लिखे वेद-पुराण?

वेदो की रचना कब हुई और कैसे हुई किसने की और उन वेदों में आखिर है, क्या बहुत महत्वपूर्ण है। यह जानना विषय बहुत बड़ा है, विस्तृत है लेकिनबहुत ही संक्षिप्त में इस पूरे विस्तार का सार समझने की कोशिश करते हैं।आपने वेदों पर जितने लेख पढ़े होंगे, कहानियां सुनी होंगी। पढ़ी होंगी।वीडियोस देखे होंगे। उनमें से किसी में भी आपने कुछ ऐसे तथ्य नहीं पढ़ेऔर सुने होंगे जो आज आप सुनेगे। इसका साधारण सा कारण है कि आप नेइतिहासकारों के स्टोरी अंश के पक्ष सुने।पुरातत्व वेतन के पक्ष सुने।आर्कियोलॉजिस्ट के वचन स्कॉलर सोरायसिस के पक्ष सुने। कथावाचक  औरपोती वाचक उनके पक्ष सुने |   विज्ञानियों के माथ जानेशिक्षाविदों व्याख्यान यूके भी मत जाने |

(वेद कब लिखा गया था?)

वेद-पुराण

लेकिन जो आज सुनने से रह गए, वहपूर्ण संतों का मत है जो सबसे सही है, सच्चा है और सटीक भी है। कुछ का मतहै। 4 से 5000 ईसा पूर्व वेद लिखे गए तो कुछ विद्वानों का मानना है

कि 2 से ढाई हजार ईसा पूर्व लिखे गए कहीं प्रमाण अट्ठारह सौ ईसा पूर्व सेपंद्रह सौ ईसापुर या 600 ईसा पूर्व तक के जो लिखे गए।

विज्ञान का माथ

विज्ञान कहता है कि एक बहुत बड़ा बिगबैंग हुआ।इसको हिंदी में कहें तो एक बहुत बड़ा धमाका हुआ बहुत बड़ा और सृष्टि निर्माण शुरू हो गया। कैसे हुआ कहां से आया अध्यात्म कहता है कि एक कुल मालिक है। सबका करता धर्ता और सब उसकी ही आवाज पर टिका है। पहले यहां कुछ भी नहीं था। फिर उसके विस्तार की इच्छा हुई और उसने जोर की उम्र हुंकार भरी और वह आवाज उसे आप बिगबैंग कह लो या चाहे कुछ भी कह लो उसमें जो वाइब्रेशन था जो कंपन था जो ऊर्जा थी, उससे सारी सृष्टि आ बनती। चली के गृह बनतेचले गए। नक्षत्र बनते चले गए। सितारे आकाश के दामन में बिखर चले गए।अनगिनत आकाशगंगा में बनती चली गई और न जाने क्या-क्या?

 (दुनिया की रचना कैसे हुई ?)

यह सब होने में सेट होने में ठंडा होने में लाखों करोड़ों साल लग गए। नजाने कितने लाखों करोड़ों साल कितने युग और कल के बीतने के कितना समय लगाहोगा। अंदाजा लगाना मुश्किल है तब जाकर सृष्टि ने अंतरिक्ष में ग्रहों नेऔर ग्रहों पर हम जैसे जीवन अपना अस्तित्व पाया तो अब हम हम कहां से आ गएतो बड़ी प्रचलित यही है। विज्ञानियों की दी हुई कि करोड़ों वर्षों मेंधरती ठंडी हुई से समंदर उसे जीवन शुरू हुआ। वह समुद्री जीवन धरती की तरफबढ़ा और लाखों वर्षों में कई जीव धरती धीरे-धीरे विकसित हुए। दुनिया की रचना कैसे हुई ?

 क्या human evolution theory सही है?

वानर से मानव बनने की पूरी एक बहुत बड़ी थिअरी है। सब उसको सच भी मानते हैं

क्योंकि उसको मानने के अलावा हमारे पास रास्ता ही क्या है?

जो हमें बताया जा रहा है कि हमने विज्ञान के आधार पर यह पता लगाया। गणितके हिसाब किताब से यह हिसाब लगाया है और यही सच है। हमारे पास इसको मानलेने के सिवा और रास्ता ही क्या है,

लेकिन आध्यात्म का विज्ञान इस बात कोनहीं मानता कि मनुष्य वानर से मानव बना।

अगर पिछले लाखों सालों में वानरमनुष्य बन गए तो यह इतने वानर अब तक मनुष्य बनने से कैसे बचे रह गए। भाईइनमें तो मनुष्य बनने के लक्षण भी अभी तक दिखाई नहीं दे रहे। अरे भाई जबवानर मनुष्य बन चुका तो वानर वानर कैसे रह गए। अब तक कभी सोचा नहीं। आपने

विज्ञानी पूर्ण संत होते हैं, आप सुन लीजिएअब आप आज पूरीबात सुन लीजिएगा जरूर क्योंकि यह तेरी आपने न कह।सुनी ना आपको और कहीं सुनने को मिलेगी शिवा पूर्ण संत की और कहीं भीनहीं। बहुत रिसर्च करके यह सारे कंटेंट खोजबीन करके आपके लिए बड़ी मेहनतसे लाया हूं तो सुन लीजिए। आप एक बार और आप इस पर और गहन अध्ययन करने अगरनिकले कभी तो ध्यान रखिएगा। चौराहे चौराहे पर गुरु घंटाल बाबाओं को पूर्णसंत मानकर धोखा खाने की गलती मत कीजिएगा। प्लीज संत इतनी आसानी से मिलतेभी नहीं है।

वेद पुराण मे क्या लिखा गया है

तो अध्यात्म कहता है,

कि काल भगवान जो सृष्टि के मालिक हैं, उन्होंने उस कुल मालिक की अखंड तपस्या की कितने समय तक तपस्या की होगी, उसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।  कोई मालिक जो ईश्वर के भीमालिक यानी स्वामी है और ब्रह्म के भी और पारब्रह्म के भी वही स्वामी औरमहाकाल के भी वही स्वामी हैं,वह सबके स्वामी वह जब प्रसन्न हो गए तो उन्होंने कहा कि तुम जो मांग लो वही हम तुमको दे देंगे तो इन्होंने एक राज मांग लिया और उन्होंने एवं स्तुति दिया कि हमने तुमको दे दिया।  तो उन्होंने कहा कि हमको कुछ जीवात्मा है। दे दीजिए वरना हम राज किस पर करेंगे तो वह तो समंदर है महा साद।

तू कुछ जीवात्मा है। उन्होंने इन को दे दी। अब यह राज करने लगे जीवात्माहैं। अपना समय यहां पूरा करके वापस जाने लगे। भोसरी जीवात्मा वापस अपने लोग चली गई तो इन्होंने सोचा कि इस तरह से तो हमारा लोग पूरा खाली होजाएगा। फिर हम राज किस पर करेंगे तो इन चीजों को यहीं मिल जाए रखना जरूरीहै तो उन्होंने फिर जीवो को यही उलझा ए रखने का पूरा बंदोबस्त किया तो वह जो जीव पहले अपने घर वापस चले जाते थे, वहीं अवस्था थी। मोक्ष की अवस्था और जो अब काल के बनाए इन फंडों में उलझे हुए हैं। जी तो यह है बंधन ईश्वर ने आद्या मा शक्ति के साथ मिलकर तीन पुत्रों को जन्म दिया।

ब्रह्मा विष्णु और महादेव प्रखंड तपस्या को चले गए।

जब तीनों बड़े हुए और माता के कहने पर पिता के दर्शनों के लिए निकले तोविष्णु और महादेव को तो कोई दर्शन नहीं हुए। दर्शन तो ब्रह्मा को भी नहीं हुए, लेकिन उन्होंने पिता की आवाज सुनी। एक दीवानी हुई आकाशवाणी के हमतुमको जो बताते हैं उसको तुम सबको बता दो कि विधान बन गया है। अभिषेककर्म प्रधान सृष्टि को रचने आ गया है। अब जो जैसा करेगा उसको वैसा ही फल भोगना पड़ेगा। यह भी ध्यान रख दिया है। अब बिना हमारा हिसाब किताब पूराकिए या नहीं

मुक्ति का मार्ग

मुक्ति का मार्ग

साफ किए बिना कोई जा नहीं सकताअब से यही नियम रहेगा चार खाने अंडरस्टैंड आज उखमाजल स्थावर बना दिए गए हैं और 8400000 योनियों बना दी गई। सारे हिसाब किताब करने वाले सब विभाग।बना दी है उसमें अधिकारी बैठा दिए यानी जिनको हम देवता कहते हैं, उनको सबको बिठा दिया और सबको अपनी अपनी जिम्मेदारियां सौंप दी कि तुम उत्पत्तिकरना, तुम पालन करना, तुम संहार करना। तुम कर्मों का हिसाब किताब करो,तुम वर्षा करो, वह हर काम के लिए एक अधिकारी बिठा दिया। स्वर्ग नर्क बना दिए। ईश्वरलोक, गोलोक, बैकुंठधाम, साकेत लोकऔर यह और वह अनगिनत सब बना दिया। एक पूरी की पूरी व्यवस्था बना दी।

क्याबस सब अपना अपना काम सुचारू करो और इस तरह से सारा जाल बिछा दिया कि अपनी शक्तियों को सब शक्तियों को काम पर लगा दिया। काम का देवता क्रोध का मुंह का अहंकार मध्यमान लोग ऐसे पीछे लगा दी कि जीव किसी भी तरह से बस यही फसा अभी क्रम जननों से छूटे ना पाए और फिर इसी तरह न जाने कितने करोड़ोंकरोड़ साल बीते चले गए कि जीव को यह तक याद नहीं रहा कि वह आया कहां सेथा। कैसे आया था कैसे यहां फस गया। छूटकर वापस अपने असली घर जाने के बाद!

वेदपुराण का जनाम

चार प्रकार के वेद होता है :-

. ऋग्वेद  . यजुर्वेद .सामवेद ४.अथर्ववेद

चार प्रकार के वेद होता है :-

ब्रह्मा को ईश्वर ने आकाशवाणीकी देववाणी की वही वेद वाणी है। उसमें लिखने के कोई साधन तो विकसित हुएनहीं थे। ना कोई लेखन लीपी थी ना उसकी जरूरत रही तो वह तो स्वयं ब्रह्माठहरे। उन्होंने उस सारी वाणी को याद कर लिया। अब उन्होंने अपनी वाणी मेंअपने मानस पुत्रों को वह वेद वाणी सुना दी। इसी आधार पर ब्रह्मा के चारमुख्य से चारों वेदों की उत्पत्ति मानी जाती है मां के कई मानस पुत्र हुए लोमस ऋषि हुए जैसे महर्षि नारद हुए प्राचीन ऋषिमंत्र दृष्टा थे।अग्नि ऋषि वायु ऋषि, ऋषि, आदित्य और ऋषि अंगिरा इन 4 राशियों पर ही सबसेपहले वेदों के ज्ञान का प्रकाश किया जाना माना जाता है।

अब ऋषियों कोईआदेश दे दिया कि इस वाणी का प्रसार कर दो कि विधान बन चुका है और अब से   कर्म प्रधान विश्व रचि राखा कर्म प्रधान इस संसार को रच दिया गया है।और जो जस करहिं सो तस फल चौका जैसा जो करेगा उसको वैसा ही विधान और नियमोंके अनुसार उसको फल मिलेगा और उसको फल भोगना पड़ेगा।हजारों लाखों सलून तक यही वेद वाणी रे अंखियों में अंखियों की एक पीढ़ीसे दूसरी दूसरी से तीसरी पीढ़ी को यानि हर गुरु अपने शिष्य को शौक था।चला गया और सब कुछ गुरु मुख से सुनकर शिष्यों द्वारा याद रख कर और कंठस्थकरके आगे बढ़ता चला गया।

 वेदो मे क्या लिखा है

वेद में ब्रह्मा के बारे में दूसरे देवताओं के बारे में अखिल ब्रह्मांड के बारे में और ब्रह्म ज्ञान के अलावा साइंस है। मैथमेटिक्स अंतरिक्ष विज्ञान, उसकी गूढ़ रहस्य आयुर्वेद से विषय औषधिज्योतिष गणित रसायन, प्राकृतिक भूगोल, खगोल, धार्मिक नियम, इतिहास रितीरिवाज हर एक यानी सभी के सभी विषयों से संबंधित ज्ञान इस सारे संसार कोअगर कहीं से।मिला है तो वह यही वेद से मिला है और कहीं से नहीं वैदिक साहित्यप्रारंभ में कई सदियों तक लिखे ही नहीं गए थे। अर्थात लिपिबद्ध नहीं किएगए थे क्योंकि लिपि बंद करने की ना कोई तकनीक विकसित हुई थी। ना कोईपरंपरा प्रारंभ हुई थी तब केवल ऋषि द्वारा सुनाकर और नई पीढ़ी के दृश्योंद्वारा सुनकर और कंठस्थ कर के और याद करके और फिर अगली पीढ़ी और उसकी

अगली पीढ़ी वीडियो तक आगे बढ़ाए जाते रहे। यही क्रम सदियों तक कई-कई 100पीढ़ियों तक जारी रही। विश्व का सबसे प्राचीनतम साहित्य यह सुनकर औरकंठस्थ करके आगे बढ़ता रहा और सबसे महत्वपूर्ण भी है जिस पर सारी सृष्टिऔर सारे।मांड के नियम और सिद्धांत आधारित है।क्योंकि यह माना जाता है कि इनकी रचना स्वयं भगवान ने ईश्वर रखी है।इसलिए इसको मनुष्य द्वारा लिखकर इसका श्रेय मनुष्य ले यह ठीक नहीं मानाजाता था। इसलिए इसको लिखने की कोशिश नहीं की गई।तुझे किसी मनुष्य द्वारा नहीं रचा गया तो इसलिए इसे अपौरुषेय और एक दूसरेसे सुन सुना कर आगे बढ़ता रहा। इसलिए इसको श्रुति कहा गया और नित्य कहांगया जो कभी समाप्त न हो।प्रिय सबसे प्राचीनतम और एकमात्र वेद ही ऋग्वेद था।

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