मिथुन संक्रांति रज पर्व कथा,पूजा विधि

मिथुन संक्रांति रज पर्व कथा,पूजा विधि   

मिथुन सक्रांति की व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व।   

नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है। मिथुन सक्रांति व्रत कथा, पूजा, विधि और महत्व के बारे में मिथुन संक्रांती उनमें से एक है जिसमें सूर्य अलग अलग राशि नक्षत्र पर विराज होता है। बता दें कि इस क्रांति में दान दक्षिणा ,दान पुण्य कमाने का बहुत महत्व रहता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मिथुना सक्रांति से सौरमंडल में बहुत बड़ा बदलाव आता यानी कि मिथुन सक्रांति के बाद से ही बारिश होनी शुरू हो जाती है,

2020 Mithuna Sankranti, Sankramanam Date and Time for …

मिथुन संक्रांति  रज पर्व  कथा, पूजा विधि   

जिसे हम कहते हैं, दिन होता है, जब सूर्य से बाहर निकलता है और सारी राशियों में नक्षत्र की दिशा ही बदल दी जाए। बहुत माना जाता है यही कारण है से देश के हर कोने में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है

मिथुन संक्रांति |रज पर्व

महत्व

उड़ीसा में 4 दिन तक लोग धूमधाम से मनाते हैं। इसमें लोग बारिश का स्वागत दिल खोलकर करते हैं। खासकर अच्छी खेती और बारिश की मनोकामना करते हे|

उड़ीसा के लोग राजा पर्वा पर मनाते हैं, जिसमें ज्यादा से ज्यादा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

तो आइए जानते हैं संक्रांति के बारे में कहते हैं की जैसे महिलाओं को हर महीने मासिक होता है जो उनके शरीर के विकास के बारे में बताती है वैसे ही धरती मां या भूदेवी को शुरुआत के  महीनों में मासिक जो धरती के विकास का प्रतीक माना जाता है।  और फिर चौथे दिन को स्नान कराया जाता है कि धरती माता की पूजा की जाती है।

मिथुन संक्रांति

उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर में आज भगवान विष्णु की पत्नी की प्रतिमा विराजमान होती हे

आज भी भगवान विष्णु की पत्नी भूदेवी की चांदी की प्रतिमा विराजमान है

 

तो दोस्तों आइए जानते हैं ,मिथुन सक्रांति मनाने सही तरिका |

पूजा विधि | मिथुन संक्रांति  

 

शुरू के  दिन औरतें बिना कुछ पका हुआ खाना ही खाते हैं, वह भी बिना नमक ,इस समाये वह चप्पल भी नहीं पहनती। इस दौरान महिलाएं खा नहीं सकती हैं।

हल्दी का लेप लगाया जाता है लेकिन हां बाकी के दिन नहीं नहाया जाता है।

चौथे दिन की पूजा इस तरह की जाती है सबसे पहले सिलवट बना लिया जाता है और हल्दी चंदन सिंदूर चढ़ाया जाता है और पवित्र नदी में स्नान भी किया जाता है। इस दिन मिठाई बनाई जाती है। इस दिन भूलकर भी चावल के दाने नहीं खाने चाहिए। और देखे

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