विवाह पंचमी की तिथि , महत्व तथा विधी , कैसे करे वर की कामना ?

Vivah Panchami on Saturday, December 19, 2020

विवाह पंचमी

Panchami Tithi Begins – 02:22 PM on Dec 18, 2020

Panchami Tithi Ends – 02:14 PM on Dec 19, 2020 

स्वागत है आप सभी का ASTROSHASTRIGURU ब्लॉग पर मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम और माता सीता की पूजा करने से मनचाहे वरदान की प्राप्ति होती है और साथ ही सभी प्रकार के वैवाहिक समस्याओं का भी अंत होता है। संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ करना भी माना जाता है। विवाह पंचमी साल 2020 में 19 दिसंबर 2020 को है। आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि उसे पंचमी की तिथि क्या रहेगी। पूजा विधि क्या है। विवाह पंचमी की कथा व महत्व तो चलिए शुरू करते हैं।  अगर आप मेरे ब्लॉग पर नए है और इसे सब्सक्राइब नहीं किया है तो आगामी आरोपियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आज मेरे ब्लॉग को सब्सक्राइब कर ले।

  • पूजा कब और कैसे करे?

विधी:

स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद राम विवाह का संकल्प ले सीता जी की मूर्ति या उनकी प्रतिमा को स्थापित करें। स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें। माता सीता और भगवान राम के मंत्रों का जाप करते हुए भगवान राम और सीता का गठबंधन करें। उसके बाद भगवान राम और सीता जी की आरती करें और गांठ लगे। वह अपने पास संभाल कर रख ले। इसके पश्चात माता सीता और भगवान राम को भोग लगाएं और पूरे घर में प्रसाद का वितरण करें। स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें। साल 2020 में 19 दिसंबर 2020 दिन शनिवार को पंचमी तिथि कब प्रारंभ होगा। 18 दिसंबर की दोपहर 2:22 पर समाप्ति होगी। 19 दिसंबर की दोपहर 2:14 पर की कथा के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के रूप में पैदा हुए थे। राजा दशरथ के घर पैदा हुए राम जी माता सीता पैदा हुई थी। पुत्री रूप में राजा जनक के यहां की सीता माता का जन्म धरती से हुआ था। जब राजा जनक हरजोत रहे थे तब उन्हें एक नन्ही सी बच्ची मिली। यह कोई और नहीं मां सीता ही थी। एक बार माता सीता ने मंदिर में रखे धनुष को उठा लिया था। धनुष को परशुराम के अलावा और कोई नहीं उठा पाया था। तब से राजा जनक नहीं है। खुश हो कर डाली थी कि जो कोई भी भगवान विष्णु के उस धनुष को उठाएगा उसी से सीता माता का विवाह होगा। में महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्ष्मण लक्ष्मण भी दर्शन के दशक के रूप में बैठे थे। सीता माता के स्वयंवर में कई राजाओं ने प्रयास किया लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला नहीं पाया। इस प्रकार राजा जनक ने कहा भरे शब्दों में कहा कि मेरी सीता के लिए कोई योग्य वर नहीं है। तब राजा जनक को देख महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से स्वयंवर में हिस्सा लेने के लिए कहा की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान  श्री राम ने धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे। वक्त धनुष टूट गया। भगवान श्रीराम ने बलिष्ट को देख माता सीता उन पर मोहित हो गई और जयमाला श्रीराम के गले में डाल दी। भव्य आयोजन में माता सीता और भगवान श्री राम का विवाह संपन्न हुआ।

पूजा आरती

  • क्या है विवाह पंचमी का महत्व ?

विवाह की सबसे बड़ी तिथि के बारे में जी हां विवाह की ऐसी तिथि जो सबसे ज्यादा पवित्र मानी जाती है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का विवाह हुआ था। बात करेंगे। विवाह पंचमी की सबसे पहले जानते हैं कि विवाह पंचमी है।

  • क्या और श्री राम के विवाह का यह मामला क्या है?

देखिए मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था। इस तिथि को भगवान राम के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसको विवाह पंचमी भी कहते हैं। भगवान राम चेतना के प्रतीक हैं और माता सीता प्रकृति शक्ति की प्रतीक हैं। अतः चेतना और प्रकृति का मिलन होने की वजह से यह दिन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करवाना और इस विवाह उत्सव में शामिल होना बहुत शुभ माना जाता है। इस बार विवाह पंचमी 1 दिसंबर को मनाई जा रही है जिसको हम माना जाता है। इस बार विवाह पंचमी 1 दिसंबर को मनाई जा रही है जिसको हमसबको मिलकर के जरूर मनाना चाहिए। विवाह पंचमी के दिन किस तरीके के वरदान मिल सकते हैं।

  • कैसे करे वर की मनो-कामना ?

अब यह भी समझ लेते हैं। देखिए। अगर विवाह होने में बाधा आ रही है तो विवाह पंचमी पर उपाय करने से यह समस्या दूर हो जाती है। मनचाहे विवाह का वरदान भी अगर आप चाहते हैं। आप चाहते हैं कि आपका मनचाहा विवाह हो तो वह वरदान भी आपको विवाह पंचमी पर मिल सकता है। वैवाहिक जीवन में अगर समस्या आ रही है तो विवाह पंचमी पर उस समस्या का अंत भी हो जाता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता के संयुक्त रूप से उपासना करने से एक  साथ पूजा करने से विवाह होने में आ रही अगर कोई बाधा है तो उस बाधा का  नाश होता है। इस दिन बालकांड में भगवान राम और माता सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना बड़ा। शुभ होता है रामचरितमानस में जहां भगवान राम और माता सीता के विवाह का वर्णन है उसको पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है विवाह पंचमी के दिन। व्हाट इस दिन संपूर्ण रामचरितमानस का अगर पाठ किया जाए तो पारिवारिक जीवन सुख में होता है। पारिवारिक जीवन मंगलमय होता है। अब यह जानते हैं कि विवाह पंचमी पर भगवान राम और माता सीता का विवाह किस प्रकार से करवाएं। किस प्रकार से यह पर्व मनाए। प्रातः काल स्नान करके मैं श्री राम जी का विवाह करवा लूंगा या करवाऊंगी। इसका संकल्प लें। नान करने के बाद विवाह   के कार्यक्रम का आरंभ करें। भगवान राम और माता सीता की प्रतिकृति उनकी मूर्ति या चित्र की स्थापना करें। भगवान राम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद या तो इनके सामने बालकांड में जो विवाह का मामला है। राम और सीता के विवाह का उल्लेख है। उसका पाठ करें या। ओम जानकी वल्लभ भाई नमः ओम जानकी वल्लभ भाई नमः इस मंत्र का 108 बार जप करें। इसके बाद माता सीता और भगवान राम को जो वस्त्र अर्पित किया था, उन वस्तुओं में आपस में गांठ लगा दें। गठबंधन कर दें। इसके बाद उनकी आरती करें और आरती के बाद जुगाड़ लगे हुए वस्त्र हैं। इनको अपने पास सुरक्षित रख ले। इनको अपने पास रखने से आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा और अगर आप का विवाह नहीं हो पाया है तो आपका विवाह जल्दी होगा। अब यह जानते हैं कि श्री राम विवाह के दिन किन मंत्रों का जप करने से विवाद जल्दी होगा। विवाह शीघ्र होगा। विकी श्री राम विवाह के दिन पीले वस्त्र धारण करें। तुलसी या चंदन की माला से मंत्र का या दोनों का जितना संभव हो, यथाशक्ति जप करें या 108 बार जप करें। जप करने के बाद शीघ्र विवाह या अच्छे वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें। आपको बहुत सारे दोहे बताने जा रहे हैं। इसमें से किसी भी एक दोहे का जप करना आपके लिए लाभकारी होगा पहला दोहा। प्रमुदित मुनि नाभा वेरी-वेरी प्रमुदित मुनि ने भावी पीढ़ी ने सहित शबरी त्रिवेदी राम सिया सिर्फ सिंदूर देवी शोभा कहीं न जाति विधि की भगवान राम ने सीता माता को सिंदूर लगाया था। उस समय का दोहा है यह दूसरा पाणिग्रहण जबकि नमः शहर से तब शक्ल सुरेशा वेद मंत्र मुनिवर उच्च रही। जय जय जय जय शंकर सूर्य करें। भगवान शिव के विवाह का वर्णन है। तीसरा दोहा सुनु सिय सत्य, असीस हमारी पूजहि मन कामना, तुम्हारी नारद वचन सदा सुखी चाचा सो बरु मिलाई जाए। मनु राजा माता सीता माता गौरी की पूजा करने जाती है। स्वयंवर के पहले उस समय का दोहा है। इसमें से किसी भी एक  दो ही का जब आप मंत्र की तरह से कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी नव दंपति को जिनकी नई नई शादी हुई हो, उनको अपने घर पर बुलाइए। उनका यथोचित सम्मान करिए। उन्हें भोजन कराइए और पति-पत्नी दोनों को उपहार देकर के दोनों का आशीर्वाद दीजिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका विवाह जल्दी से जल्दी हो जाए।

{मेरे ब्लॉग में अब तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद फिर मिलेंगे किसी नए ब्लॉग के साथ}

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